धरमजयगढ़ में नियमों की उड़ाई धज्जियां! जनप्रतिनिधि ही बन बैठे सप्लायर



धरमजयगढ़ - जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के अंतर्गत आने वाले कई ग्राम पंचायतों में पंचायती राज नियमों की खुली अनदेखी का मामला सामने आ रहा है। जानकारी के अनुसार कई जगहों पर पंचायत के जनप्रतिनिधि स्वयं ही वेंडर (आपूर्तिकर्ता) के रूप में पंजीकृत होकर पंचायत के कार्यों में सामग्री सप्लाई कर रहे हैं और बाकायदा भुगतान भी प्राप्त कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ पंचायतों में तो पूरे परिवार के सदस्यों को ही अलग-अलग नाम से वेंडर के रूप में पंजीकृत कर लिया गया है।

पंचायती राज व्यवस्था में स्पष्ट प्रावधान है कि पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधि या उनके निकट संबंधी पंचायत के कार्यों में सीधे आर्थिक लाभ लेने वाली स्थिति में नहीं रह सकते। इसके बावजूद धरमजयगढ़ क्षेत्र की कई पंचायतों में जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों के नाम से वेंडर पंजीयन कराकर सामग्री आपूर्ति और भुगतान लेने की जानकारी सामने आ रही है।

सूत्रों के अनुसार निर्माण सामग्री, स्टेशनरी, पाइप, सीमेंट, रेत सहित अन्य सामानों की आपूर्ति इन्हीं पंजीकृत वेंडरों के माध्यम से दिखाई जा रही है। कई मामलों में यह भी बताया जा रहा है कि पंचायत के निर्णय लेने वाले पदों पर बैठे लोग ही अप्रत्यक्ष रूप से सप्लायर बनकर भुगतान प्राप्त कर रहे हैं, जिससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति बन रही है।

चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कुछ पंचायतों में एक ही परिवार के कई सदस्यों को अलग-अलग नाम से वेंडर सूची में दर्ज कर लिया गया है। इससे पंचायत की खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो रही है और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि ही वेंडर बन जाएंगे तो फिर पंचायत की निगरानी और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी। इससे सरकारी राशि के दुरुपयोग और अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है।

इस पूरे मामले को लेकर अब उच्च स्तर पर जांच की मांग उठने लगी है। जानकारों का कहना है कि यदि पंचायतों की वेंडर सूची और भुगतान रजिस्टर की गहन जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि जल्द ही इस संबंध में संबंधित विभागों को पत्राचार कर जांच की मांग की जाएगी ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

धरमजयगढ़ क्षेत्र की पंचायतों में चल रही इस व्यवस्था ने पंचायती राज प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में इस मामले की सच्चाई सामने आने पर कई और परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।

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