धरमजयगढ़। शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और जनकल्याणकारी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस)धरमजयगढ़ क्षेत्र में अपने उद्देश्य से भटकती नज़र आ रही है। गरीबों के लिए आवंटित खाद्यान्न आज स्वयं गरीबों की पहुँच से दूर होता जा रहा है। स्थिति यह है कि हितग्राहियों से मशीन पर अंगूठा तो समय पर लगवा लिया जाता है, किंतु महीनों तक उन्हें चावल नसीब नहीं होता।
धरमजयगढ़ में पीडीएस व्यवस्था का हाल यह हो गया है कि गरीब राशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि दुकानों में शॉर्टेज का खेल खुलेआम जारी है।
अतिरिक्त आवंटन के नाम पर बड़ा घोटाला, खाद्य विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते कुछ वर्षों से अतिरिक्त आवंटन के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। इस मामले में धरमजयगढ़ में पूर्व पदस्थ एक अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच भी जारी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त अतिरिक्त आवंटन की भरपाई आज तक नहीं हो सकी, दुकानदार बदलते रहे, लेकिन शॉर्टेज जस का तस बना हुआ है। यह स्थिति पूरे सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस मामले में केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाते दिखाई दे रहे हैं। न तो ठोस कार्रवाई हो रही है और न ही प्रभावी रिकवरी।
ग्रामीणों के अंगूठे से पुरानी शॉर्टेज की भरपाई
कुछ दिन पूर्व गोलाबूढ़ा क्षेत्र के एक ग्रामीण ने बताया कि पूर्व दुकानदार द्वारा छोड़ी गई शॉर्टेज की भरपाई* वर्तमान में ग्रामीणों से अंगूठा लगवाकर की जा रही है।
इतना ही नहीं, विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन हेतु आवंटित चावल तक कुछ दुकानदारों द्वारा हजम किए जाने की बातें सामने आ रही हैं, जिसे विभाग अनदेखा करता प्रतीत हो रहा है। मीडिया में मामला उजागर होने के बावजूद कार्रवाई से प्रशासन के हाथ-पांव फूलना, आम जनता की समझ से परे है।
पहले अंगूठा, फिर महीनों तक राशन गायब
बता दें,मिरिगुड़ा, विजयनगर, गोलाबुड़ा, नकना, पाराघाटी सहित अनेक ग्राम ऐसे हैं, जहां हितग्राहियों से पहले अंगूठा लगवा लिया जाता है, लेकिन राशन कई-कई महीनों तक नहीं दिया जाता।
दुकानदार इस राशन का उपयोग अपनी पुरानी शॉर्टेज पाटने में कर रहे हैं, और गरीब जनता मूक दर्शक बनी हुई है।
नोटिस पर नोटिस, लेकिन रिकवरी अब भी अधूरी
विभाग द्वारा समय-समय पर दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए, किंतु उनका जमीनी असर शून्य दिखाई देता है। शॉर्टेज लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि रिकवरी की प्रक्रिया आज तक अधूरी है।
ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि यह *स्थानीय प्रशासन की नाकामी है या फिर किसी प्रकार का संरक्षण?
धरमजयगढ़ की पीडीएस व्यवस्था में व्याप्त यह अव्यवस्था अब तत्काल उच्चस्तरीय जांच और कठोर कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि गरीबों के हक़ पर हो रहे इस खुले खेल पर विराम लग सके।