धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ विकासखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली अब राहत नहीं, बल्कि गरीबों के लिए पीड़ा का कारण बनती जा रही है। राशन दुकानों पर हालात ऐसे हैं मानो गरीबों का हक़ किसी की मेहरबानी पर निर्भर हो गया हो। राशन संचालकों की मनमानी खुलेआम जारी है और संबंधित विभागीय अधिकारियों की चुप्पी इस मनमानी को मौन सहमति देती प्रतीत होती है।
वहीं ग्रामीण अंचलों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि राशन वितरण में अनियमितता, कम तौल, सामग्री में कटौती और केवाईसी के नाम पर अवैध वसूली की गई है। कई बार हितग्राहियों ने विभागीय अधिकारियों से लिखित व मौखिक रूप से गुहार लगाई, लेकिन हर बार आश्वासन की घुट्टी पिलाकर उन्हें शांत कर दिया गया। कार्रवाई की उम्मीद में बैठे गरीबों के हिस्से में अंततः निराशा ही आई।
बता दें,सूत्रों के अनुसार हाल ही में कुछ गांवों में राशन वितरण की गड़बड़ियों के खिलाफ हितग्राहियों ने विरोध दर्ज कराया। मामले को गंभीर मानते हुए एक पूर्व जनपद पंचायत सदस्य ने विभाग में शिकायत भी दर्ज कराई। शुरुआत में अधिकारियों ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए, लेकिन समय बीतते ही वे संकेत भी खोखले साबित हुए। और विभाग द्वारा टाल मटोल करते हुए दिन महीने साल गुरजते जाते हैं, न जांच हुई, न दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई। और फिर गरीब मजदूर किसान आखिर जाएं तो जाएं कहां, और इतिहास गवाह है, सिस्टम गरीब,असहाय को ही दबाते आता रहा है।
बहरहाल आज स्थिति यह है कि धरमजयगढ़ विकासखंड में राशन वितरण में लापरवाही और भ्रष्टाचार सामान्य बात बन चुकी है। सबसे अधिक मार उन्हीं लोगों पर पड़ रही है, जिनके लिए यह व्यवस्था बनाई गई थी—गरीब मजदूर, किसान और जरूरतमंद परिवार। उनकी पीड़ा, उनका दर्द, फाइलों और आश्वासनों के बोझ तले दबता रहा है। और इससे विभागीय अधिकारियों को कोई फर्क भी क्या पड़ना है।