धरमजयगढ़ में कोयला माफिया का तांडव,संगरा नदी से बाकारूमा वनपरिक्षेत्र तक अवैध खनन का तांडव, लाल ईंट भट्ठों तक काले कोयले की सप्लाई!

धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ अंचल में कोयला माफियाओं का दुस्साहस अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। संगरा नदी क्षेत्र में लाखों रुपये के अवैध कोयला डंप के खुलासे के बाद अब बाकारूमा वनपरिक्षेत्र से भी काले कारोबार की परतें उधड़ने लगी हैं। लालमाटी, ढोढागांव और सजवारी जैसे संवेदनशील इलाकों में माफियाओं द्वारा बेखौफ होकर अवैध कोयला खनन किया जा रहा है और इस कोयले की बड़े पैमाने पर आपूर्ति क्षेत्र के लाल ईंट भट्ठों में की जा रही है। वहीं सूत्रों के अनुसार, जंगल और पहाड़ी इलाकों में मजदूरों को झोंककर अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा है। वहीं पोकलेन और अन्य भारी मशीनों की मदद से जंगल के भीतर रास्ते तैयार किए गए हैं, ताकि ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के जरिए कोयले की ढुलाई निर्बाध रूप से हो सके। यह पूरा खेल वन कानूनों, पर्यावरण नियमों और खनिज अधिनियमों की खुली धज्जियां उड़ाता नजर आ रहा है। और चौंकाने वाली बात यह है कि बाकारूमा वनपरिक्षेत्र से निकाला गया अवैध कोयला सीधे क्षेत्र में निर्माण कार्यों और लाल ईंट भट्ठों तक पहुंचाया जा रहा है, जहां इसे खुलेआम खपाया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब अवैध कोयले की ढुलाई और खपत इतनी व्यापक है, तो संबंधित विभागों की नजर आखिर कहां है। और वहीं दूसरी तरफ संगरा नदी क्षेत्र में अवैध सड़क और कोयला डंप पर वन विभाग की आंशिक कार्रवाई के बाद भी कोयला जस का तस पड़ा होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। अब जब अवैध खनन का दायरा बाकारूमा वनपरिक्षेत्र तक फैल चुका है, तो यह मामला केवल एक स्थान विशेष का नहीं, बल्कि पूरे धरमजयगढ़ क्षेत्र में फैले संगठित कोयला माफिया नेटवर्क की ओर इशारा करता है। वहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभागीय असमंजस और सीमित कार्रवाई के चलते कोयला माफियाओं के हौसले बुलंद हैं? क्या वन, राजस्व और खनिज विभाग एक-दूसरे के अधिकार क्षेत्र की आड़ में जिम्मेदारी से बच रहे हैं? लेकिन वहीं कोयला जैसी राष्ट्रीय संपदा का इस तरह जंगलों से लूटा जाना और ईंट भट्ठों में खपाया जाना पर्यावरण, कानून और आम जनता—तीनों के साथ खुला विश्वासघात है। अब देखना यह है कि प्रशासन केवल जांच और खानापूर्ति तक सीमित रहता है या फिर कोयला माफियाओं पर निर्णायक प्रहार कर धरमजयगढ़ को इस काले कारोबार से मुक्त करता है। सवाल साफ है—कार्रवाई कब और माफिया कब तक?
संगरा गांव के नाले में अवैध कोयला खनन, डंपिंग 

अवैध कोयला खनन मार्ग संगरा 

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