अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़ एक्शन मोड में – धरमजयगढ़ के 18 कोल ब्लॉक पर बड़ी सुनवाई, ग्रामीणों की आवाज हुई बुलंद
धरमजयगढ़ (रायगढ़) – अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़ ने धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल और धरमजयगढ़ रेंज में प्रस्तावित 18 कोल ब्लॉकों के मामले को गंभीरता से लेते हुए बड़ी पहल की है। आयोग द्वारा सुनवाई शुरू होने से क्षेत्र के 52 ग्राम पंचायतों में रहने वाले आदिवासी ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह और उम्मीद का माहौल बन गया है।यह पूरा क्षेत्र पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून के अंतर्गत आता है, जहां घने जंगल और जंगली हाथियों का प्रमुख रहवास क्षेत्र है। छाल और धरमजयगढ़ रेंज के लगभग 36,041 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में हाथियों का झुंड लगातार विचरण करता है, जिससे यह इलाका अत्यंत संवेदनशील बन चुका है।ग्रामीणों ने आयोग के समक्ष बताया कि वर्ष 2001 से अब तक हाथियों के हमलों में 167 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 113 मौतें सिर्फ छाल और धरमजयगढ़ रेंज में हुई हैं। वहीं, 2005 से अब तक 63 हाथियों की भी मृत्यु दर्ज की गई है, जिनमें से 54 हाथियों की मौत इन्हीं क्षेत्रों में हुई है। इससे स्पष्ट है कि यह क्षेत्र हाथियों का स्थायी आवास बन चुका है।इसी संवेदनशील क्षेत्र में 18 ओपन कोल ब्लॉक चिन्हांकित किए गए हैं, जिनमें से 5 कोल ब्लॉकों की नीलामी पहले ही की जा चुकी है। ग्रामीणों ने इन 6 कोल ब्लॉकों को निरस्त करने और शेष 12 कोल ब्लॉकों की नीलामी पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई है।
धरमजयगढ़ में 18 कोल ब्लॉक को निरस्त करने की मांग को लेकर एक जुट हुए थे ग्रामीण।
धरमजयगढ़ में इस मुद्दे को लेकर 29 दिसंबर 2026 को लगभग 5 हजार ग्रामीणों ने धरमजयगढ़ में विशाल आमसभा और रैली निकालकर जोरदार विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता सजल मधु ने देश के प्रमुख विभागों और उच्च पदस्थ अधिकारियों को रजिस्ट्री के माध्यम से पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया।
अनुसूचिति जनजाति आयोग पहुंचे प्रभावित ग्रामीण,दर्ज कराया बयान।
रायपुर अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा 8 अप्रैल 2026 को सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर ग्राम पंचायत पुरुंगा, कोकदार, समारसिंघा, किदा और बायसी कालोनी के प्रतिनिधि उपस्थित हुए जिसमें टोकानंद राठिया, ताल सिंह राठिया, जितेंद्र राठिया, महेंद्र सिदार, एवं सजल मधु ने स्पष्ट रूप से कहा कि पूरा क्षेत्र पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के अंतर्गत आता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का खनन कार्य आदिवासी हितों और पर्यावरण के खिलाफ होगा।ग्रामीणों ने आयोग से मांग की कि छाल और धरमजयगढ़ रेंज को हाथी प्रभावित क्षेत्र घोषित कर जंगल को आरक्षित किया जाए तथा नीलामी किए गए 6 कोल ब्लॉक, दुर्गापुर शाहपुर SECL कोल ब्लॉक, भारत एल्यूमिनियम कंपनी और डी. बी.पॉवर लिमिटेड के दो ओपन कोल ब्लॉक सुप्रीम कोर्ट से निरस्त करने के बाद पुनः कोल मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा नीलामी के बाद उक्त दोनों कंपनी कर्नाटक पॉवर लिमिटेड को मिला है,मेसर्स अंबुजा सीमिटेंस पुरुंगा अडानी, सेरबन नीलकंठ प्राइवेट लिमिटेड कोल ब्लॉक, और बायसी वेस्ट इंद्रमणि कोल ब्लॉक को निरस्त करने तथा 12 चिन्हांकित कोल ब्लॉक,चैनपुर कोल ब्लॉक, नवगांव ईस्ट,नवगांव वेस्ट, छाल कोल ब्लॉक,बोजिया कोल ब्लॉक,ओंगना पोटिया कोल ब्लॉक,रामनगर कोल ब्लॉक,तेंदुमुरी कोल ब्लॉक, कोयलार कोल ब्लॉक,बायसी कोल ब्लॉक,फतेपुर कोल ब्लॉक,फतेपुर वेस्ट कोल ब्लॉक की नीलामी को तत्काल रोक लगाने का बयान देते हुए सभी प्रस्तावित खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की बात कही गई।
अनुसूचित जनजाति के सचिव प्रभावित ग्रामीणों का करेंगे दौरा।
रायपुर सुनवाई के बाद अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव ने स्वयं क्षेत्र का दौरा करने की बात कही और ग्रामीणों से पूर्व सूचना देने का आग्रह किया। इस फैसले के बाद ग्रामीणों का हौसला और भी मजबूत हो गया है और पूरे क्षेत्र में इस पहल की चर्चा जोरों पर है। अब सभी की नजरें आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर ठोस निर्णय लिया गया, तो यह न सिर्फ 52 ग्राम पंचायतों के आदिवासियों बल्कि घने जंगलों और बेजुबान हाथियों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
