![]() |
| file photo forest area chhal |
छाल, धरमजयगढ़। वन संरक्षण और हरियाली के नाम पर संचालित योजनाएँ जब स्वयं सवालों के घेरे में आ जाएँ, तो चिंता स्वाभाविक है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है वन मण्डल धरमजयगढ़ के अंतर्गत छाल परिक्षेत्र से, जहाँ आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 562 में चल रहा एएनआर (सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन) वृक्षारोपण कार्य विवादों में घिर गया है।जानकारी के अनुसार, एएनआर योजना के तहत बनाए जा रहे कंटूर ट्रेंच (सीपीटी) का निर्माण श्रमिकों के माध्यम से किए जाने के बजाय जेसीबी जैसी भारी मशीनों से कराया जा रहा है। जबकि एएनआर योजना का मूल उद्देश्य प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों का संरक्षण, वर्षा जल का संचयन और स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है। यह योजना श्रमप्रधान मानी जाती है, जिसमें मशीनों के उपयोग को सामान्यतः हतोत्साहित किया जाता है। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कार्यस्थल पर लगातार मशीनों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही है। इससे न केवल मजदूरों के हाथों से काम छिनने की आशंका है, बल्कि योजना की आत्मा भी प्रभावित हो रही है। यदि स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी स्वीकृति में मशीन उपयोग का कोई उल्लेख नहीं है, तो यह सीधे-सीधे वित्तीय अनुशासन और प्रक्रियागत नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। और वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए है। आगे उनका कहना है कि यदि एएनआर जैसी संवेदनशील योजना में भी नियमों की अनदेखी होगी, तो वन संरक्षण और ग्रामीण रोजगार दोनों ही उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
अब देखना यह है कि विभागीय अधिकारी इस पर क्या रुख अपनाते हैं—क्या मशीनों के उपयोग को वैध ठहराया जाएगा या फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल, आरक्षित वन कक्ष 562 में उठे इस विवाद ने वन अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Tags
छाल
