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अऊ विधायक ह आरोप लगाइन कि धान खरीदी के नाम पर जांच–पड़ताल के प्रक्रिया ले किसान मन ला अनावश्यक रूप से परेशान करे जात हवय। कहिन कि- “धान खरीदी करे बर नई सकत हवय त धान खरीदी म जांच करवावथे, किसान के घर एसडीएम, पटवारी, तहसीलदार कतका धान का धान कइके जांच करे बर जावथे, जना मना किसान ह चरस गांजा के खेती करे हवय, वाह रे भाजपा लबरा सरकार, धान खरीदी करत हस कि लोगन मन ला परेशान करत हस।” आगे अपन भाषण म विधायक ह रायगढ़ जिला म प्रस्तावित कोयला खदान के मुद्दा भी उठाइन अऊ कहिन - “हमर रायगढ़ जिला म कोयला खदान बर अडानी ल भेजत, त कब कोन कोन हाथ मिलावत हवय, किसान मनके जल जंगल जमीन लुटे बर।”
विधायक राठिया भावनात्मक अंदाज़ म किसान मन ले सवाल पूछिन - “कइसे गा मोर क्षेत्र के किसान मन, आप मन ह अपन जमीन ल दहू कंपनी ल, अपन मां ल बेचहू, अपन बाप ल गिरवी रखहू क?” सभा म बैठे किसान मन घलव एक स्वर म जवाब दिन — “कभूं नई,कभूं नई।”
बहरहाल धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मनरेगा योजना को ग्रामीण जीवन की आधार रेखा बताते हुए इसके संरक्षण की मांग की। साथ ही धान खरीदी की सीमा बढ़ाने, प्रक्रिया सरल करने और किसानों को सम्मानजनक व्यवहार देने की बात कही गई और वहीं समापन के अवसर पर आयोजकों ने कहा कि यह आंदोलन किसानों और मजदूरों की आवाज़ है, जो तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता। और वहीं धरमजयगढ़ का यह धरना प्रदर्शन क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ किसानों की पीड़ा और असंतोष का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरता दिखा।
