धरमजयगढ़़ में विधायक राठिया का बड़ा बयान:धान खरीदी जांच को विधायक ने बताया ‘चरस-गांजा खेती जइसन व्यवहार'!


धरमजयगढ़। बीते दिन धरमजयगढ़ के ऐतिहासिक दशहरा मैदान में एक दिवसीय धरना–प्रदर्शन आयोजित किया गया, जहाँ मनरेगा योजना के संरक्षण तथा किसानों के धान खरीदी की निर्धारित सीमा बढ़ाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। जहां पर क्षेत्र से आए किसानों आमजनताओं की उपस्थिति से कार्यक्रम जनभावना के सशक्त अभिव्यक्ति बन गया। बता दें,धरना स्थल में बने मंच से क्षेत्रीय विधायक लालजीत सिंह राठिया गरजते हुए भाजपा सरकार के कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा- कि सरकार के नीति जमीन हकीकत ले दूर, सिरिफ दिखावा म सिमट गे हवय। अपन संबोधन म विधायक ह पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के उल्लेख करत कहिन - “कांग्रेस के जब जब सरकार बनिस 72 हजार करोड़ किसान मनके कर्जा माफ करे हवय, लेकिन वहीं आज एक साल म ही किसान मनके धान खरीदी म भाजपा सरकार के पसीना छुटगे।” विधायक राठिया आगे कहिन - “भाजपा सरकार धान खरीदी म बड़े बड़े झुठा वादा करिस, 21 क्विंटल धान खरीदी करही भाजपा सरकार, त कहां करिस, ये लबरा सरकार।”

अऊ विधायक ह आरोप लगाइन कि धान खरीदी के नाम पर जांच–पड़ताल के प्रक्रिया ले किसान मन ला अनावश्यक रूप से परेशान करे जात हवय। कहिन कि- “धान खरीदी करे बर नई सकत हवय त धान खरीदी म जांच करवावथे, किसान के घर एसडीएम, पटवारी, तहसीलदार कतका धान का धान कइके जांच करे बर जावथे, जना मना किसान ह चरस गांजा के खेती करे हवय, वाह रे भाजपा लबरा सरकार, धान खरीदी करत हस कि लोगन मन ला परेशान करत हस।” आगे अपन भाषण म विधायक ह रायगढ़ जिला म प्रस्तावित कोयला खदान के मुद्दा भी उठाइन अऊ कहिन - “हमर रायगढ़ जिला म कोयला खदान बर अडानी ल भेजत, त कब कोन कोन हाथ मिलावत हवय, किसान मनके जल जंगल जमीन लुटे बर।”

विधायक राठिया भावनात्मक अंदाज़ म किसान मन ले सवाल पूछिन - “कइसे गा मोर क्षेत्र के किसान मन, आप मन ह अपन जमीन ल दहू कंपनी ल, अपन मां ल बेचहू, अपन बाप ल गिरवी रखहू क?” सभा म बैठे किसान मन घलव एक स्वर म जवाब दिन — “कभूं नई,कभूं नई।”

बहरहाल धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मनरेगा योजना को ग्रामीण जीवन की आधार रेखा बताते हुए इसके संरक्षण की मांग की। साथ ही धान खरीदी की सीमा बढ़ाने, प्रक्रिया सरल करने और किसानों को सम्मानजनक व्यवहार देने की बात कही गई और वहीं समापन के अवसर पर आयोजकों ने कहा कि यह आंदोलन किसानों और मजदूरों की आवाज़ है, जो तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता। और वहीं धरमजयगढ़ का यह धरना प्रदर्शन क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ किसानों की पीड़ा और असंतोष का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरता दिखा।

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