धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले में कोयला माफिया की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और चौंकाने वाला प्रमाण धरमजयगढ़ क्षेत्र के बोरो गांव से सामने आया है। लंबे समय से मिल रही अवैध कोयला खनन की शिकायतों के बाद 3 फरवरी 2026 को पुलिस, वन विभाग एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। छापेमारी के दौरान मौके से अवैध कोयला खनन में प्रयुक्त एक चेन माउंटेन मशीन को जब्त किया गया, जबकि जेसीबी मशीन कार्रवाई से पहले ही हटा ली गई, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि खनन माफिया को पहले ही प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लग चुकी थी। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई दिनों से क्षेत्र में भारी मशीनों की आवाजाही लगातार बनी हुई थी। खासकर रात के सन्नाटे में गूंजती मशीनों की आवाजें इस बात का साफ संकेत थीं कि जंगल की कोख में अवैध खनन का खेल बेरोकटोक चल रहा है। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत प्रशासन से की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हो सकी।
बता दें,इतिहास में पहली बार चेन माउंटेन मशीन से खनन पकड़ा गया। रायगढ़ जिले में अवैध कोयला खनन का इतिहास भले ही पुराना रहा हो, लेकिन चेन माउंटेन मशीन से खनन का यह पहला और सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है, जिसे प्रशासन ने मौके पर पकड़ कर जब्त किया है। कार्रवाई के दौरान लगभग 64 टन अवैध कोयला को थाने में जब्त किया गया। हालांकि, इससे और भी बड़ा सवाल यह है कि घटनास्थल संगरा गांव में भी डंप किया गया भारी मात्रा में अवैध कोयला अब तक प्रशासन के कब्जे में नहीं लिया गया है, जो जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। और सफेदपोश अब भी पर्दे के पीछे संभावित है, क्योंकि इस पूरे मामले में अब तक किसी भी सफेदपोश, बड़े संरक्षक या प्रभावशाली चेहरे का नाम सामने नहीं आना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है। और कार्रवाई के बावजूद अन्य प्रयुक्त वाहनों, मशीनों और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी को लेकर प्रशासन ने कोई ठोस समय सीमा तय नहीं की है, जिससे माफिया के हौसले और बुलंद होते दिख रहे हैं। क्योंकि मिली सुत्रोंनुसार आज भी लगातार बाकारूमा वनपरिक्षेत्र अंतर्गत लालमाटी, ढो़ढा़गांव,सजवारी से अवैध कोयला खनन कर क्षेत्र में परिवहन किया जा रहा है।
बहरहाल, प्रशासन का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद मशीन मालिकों, अवैध खनन में शामिल लोगों तथा पूरे नेटवर्क से जुड़े तत्वों के खिलाफ वैधानिक और सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब बड़ा सवाल यही है—क्या यह कार्रवाई कोयला माफिया की कमर तोड़ पाएगी, या फिर जांच की फाइलें भी बाकी मामलों की तरह धूल फांकती रह जाएंगी?
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