देवगंगा बोरवेल्स पर सवाल,कोड दर्ज नहीं, फिर भी लाखों के बिल, अब उन पंचायत में भी हो निष्पक्षता जांच..!


रायगढ़। जनपद पंचायत धरमजयगढ़ क्षेत्र के ढोढागांव, धौराभाठा सहित अन्य ग्राम पंचायतों में बोर खनन के नाम पर लाखों रुपये के बिल जारी किए जाने के मामले ने अब नया सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि जिस अवधि में ये बिल जारी किए गए, उस समय जीएसटी पंजीयन में बोर खनन से संबंधित आवश्यक HSN/SAC सेवा कोड दर्ज ही नहीं था।

बता दें, मेसर्स देवगंगा बोरवेल्स एण्ड कंस्ट्रक्शन, संचालक ईश्वर पटेल, निवासी लैलूंगा के विरुद्ध इसी आधार पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान स्वयं व्यवसायी ने संबंधित सेवा कोड की जानकारी नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए इसे अज्ञानतावश हुई त्रुटि बताया। विभागीय प्रतिवेदन में बाद में जमा किए गए रिटर्न और कर भुगतान को भी प्रमुख आधार बनाया गया तथा राजस्व हानि नहीं होने की बात कहते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। लेकिन सवाल अब भी वहीं खड़ा है,जब बिल जारी हुए, तब सेवा कोड मौजूद था या नहीं? और यदि नहीं था, तो उन बिलों को शासकीय पंचायतों ने किस आधार पर स्वीकार कर भुगतान किया?

वहीं दूसरा अहम सवाल यह भी है कि जीएसटी पंजीयन में आवश्यक सेवा कोड की जानकारी और उसके अनुपालन को लेकर विभागीय स्तर पर व्यवसायी को मार्गदर्शन या निगरानी की कोई व्यवस्था थी या नहीं? अज्ञानता को आधार मानकर मामले का पटाक्षेप करना क्या पर्याप्त जांच माना जा सकता है? अब जांच का दायरा केवल जीएसटी अभिलेखों तक सीमित न रहकर संबंधित पंचायतों तक पहुंचना भी जरूरी है। जिन पंचायतों में देवगंगा बोरवेल्स ने कार्य किया, वहां कार्यादेश, कोटेशन, भुगतान, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र और वास्तविक बोर खनन का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि बिल में दर्शाए गए कार्य वास्तव में स्थल पर हुए या नहीं।

फिलहाल मामले में उच्च स्तरीय जांच कार्रवाई जारी है और निगाहें उसके निष्कर्ष पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि जांच कागजी दस्तावेजों तक सीमित रहती है या पंजीयन की तारीख से लेकर बिलिंग, भुगतान और वास्तविक कार्य तक पूरी कड़ी का निष्पक्ष परीक्षण करती है। घंक्योंकि सवाल सिर्फ टैक्स जमा होने का नहीं, सवाल यह है कि जिस समय बिल जारी हुए, उस समय नियमों की स्थिति क्या

 थी?



यह न्यूज नई आवाज से लिया गया है 

Post a Comment

Previous Post Next Post