विकास की राह ताकते कोरवा, बिरहोर और पंडो परिवार, सुशासन तिहार में गूंजेगी हक की आवाज!




जन-मन योजना पर उठे सवाल, मूलभूत सुविधाओं से वंचित विशेष पिछड़ी जनजातियों की समस्याएं पहुंचेंगी सुशासन तिहार तक


*कापू,धरमजयगढ़।* रायगढ़ जिले के तहसील कापू क्षेत्र में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा, बिरहोर एवं पंडो समुदाय के लोगों की बुनियादी समस्याएं एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। क्षेत्र के जनजातीय परिवारों का आरोप है कि शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, विशेषकर *जन-मन योजना*, के बावजूद उन्हें आज तक सड़क, पेयजल और विद्युत जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।


बता दें,जानकारी के अनुसार कापू क्षेत्र के अनेक जनजातीय बस्तियों में आज भी विकास की किरण पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी वे मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्राम पंचायत कदमढोढ़ी के अंतर्गत आने वाले कुछ जनजातीय मोहल्लों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है, जहां आज भी स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों को नालों और ढोढ़ीनुमा जलस्रोतों के दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी लगातार बने हुए हैं।


वहीं ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपये की राशि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, किंतु जमीनी स्तर पर अपेक्षित विकास दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि योजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि का वास्तविक उपयोग किस प्रकार और किन कार्यों में किया गया।इन्हीं मुद्दों को लेकर क्षेत्र के जनजातीय परिवारों एवं जागरूक नागरिकों द्वारा आगामी बुधवार को कापू में आयोजित *सुशासन तिहार एवं समाधान शिविर* में शिकायत प्रस्तुत किए जाने की तैयारी की जा रही है। शिकायत के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से जन-मन योजना सहित अन्य विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा वंचित जनजातीय परिवारों को शीघ्र मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी।


अब क्षेत्रवासियों की निगाहें सुशासन तिहार पर टिकी हैं, जहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या पहल की जाती है।

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