अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से बिचौलियों ने खपाया सैकड़ों क्विंटल धान..!!!
धरमजयगढ़.....
धरमजयगढ़ क्षेत्र के धान उपार्जन केंद्रों में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि यहां ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से धान खरीदी में भारी अनियमितताएं की गई हैं।
हालात ऐसे हैं कि जिन जमीनों का वर्षों पहले भारतीय रेलवे के लिए अधिग्रहण हो चुका है, उन्हीं खसरों पर किसान पंजीयन कराकर धान की बिक्री कर दी गई है! आयसे में दूसरी और अनुसूचित जन जाति समुदाय की वनाधिकार पट्टे पर अपनी लाभ के लिए नियंबंध तरिके से पंजीयन करा कर धान का विक्रय कर दिया गया है आयसे अनेकों मामले परत दर परत सामने आने बाकी है...
छत्तीसगढ़ शासन एकीकृत पोर्टल:- कुछ और निर्देश देती है की वे भूमिहीन कृषक जो रेगहा, अधिया, प्रणाली के अंतर्गत कृषि कार्य करते है, यदि उनके पास वैध रूप से कृषि उपयोग हेतु भूमि की अनुमति हो वे भी किसान पोर्टल में पंजीयन करा सकते है
एक तरफ भाजपा सरकार धान खरीदी में बिचौलियों पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी ओर धरमजयगढ़ और दुर्गापुर धान उपार्जन केंद्रों में बिचौलियों का खेल खुलेआम जारी है। सूत्रों के अनुसार यहां कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां असली भू-स्वामी को इसकी जानकारी तक नहीं है, लेकिन बिचौलियों ने उनके नाम पर या फर्जी तरीके से अन्य भू स्वामी के खसरों पर किसान पंजीयन कराकर सैकड़ों क्विंटल धान खपा दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन खसरों का अधिग्रहण भारतीय रेलवे द्वारा वर्षों पहले किया जा चुका है, उन्हीं खसरों पर भी धान का पंजीयन कर खरीदी कर ली गई। इससे मंडी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो लाखों रुपये के धान खरीदी घोटाले का खुलासा हो सकता है।
उक्त संबंध में *कलेक्टर जिला रायगढ़ जांच* हेतु शिकायत किया जा चूका है जिसके उपरांत जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
