रायगढ़। जिस शासन की योजनाएं पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछने के लिए बनाई जाती हैं, उसी व्यवस्था में बैठे कुछ भ्रष्ट कर्मचारी उन आंसुओं की भी कीमत वसूलने से बाज नहीं आ रहे हैं। रायगढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय के राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में पदस्थ बाबू राजकुमार सिदार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) बिलासपुर ने मंगलवार को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया है, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बता दें,मामला ग्राम बुलाकी, तहसील पुसौर निवासी विजय सिदार से जुड़ा है। वर्ष 2023 में उनकी पत्नी रामकुमारी की सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी। शासन की आपदा राहत योजना के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि के लिए उन्होंने राजस्व विभाग में आवेदन किया था। प्रकरण कलेक्ट्रेट रायगढ़ में लंबित था और पीड़ित लगातार राहत राशि मिलने की प्रतीक्षा कर रहा था। आरोप है कि राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में पदस्थ बाबू राजकुमार सिदार ने मुआवजा राशि को शीघ्र बैंक खाते में जारी कराने के एवज में ₹50,000 की रिश्वत की मांग की। इतना ही नहीं, आरोपी ने कहा कि मुआवजा मिलने के बाद राशि लाकर देनी होगी और तब तक ₹50,000 का हस्ताक्षरित चेक 'गारंटी' के रूप में जमा करना होगा। अपने अधिकार की राशि के बदले रिश्वत देने से इनकार करते हुए विजय सिदार ने मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), बिलासपुर से की। शिकायत के सत्यापन में आरोप सही पाए जाने के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध कार्रवाई की। वहीं 28 जुलाई 2026 को एसीबी की टीम ने कलेक्ट्रेट कार्यालय रायगढ़ में जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी बाबू ने प्रार्थी से ₹50,000 का हस्ताक्षरित चेक प्राप्त किया, टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। और वहीं आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम, 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।वहीं एसीबी के अनुसार यह अपनी तरह का पहला मामला है, जिसमें रिश्वत की रकम तत्काल लेने के बजाय आरोपी ने भविष्य में रिश्वत सुनिश्चित करने के लिए हस्ताक्षरित चेक को गारंटी के रूप में मांगा और उसी दौरान गिरफ्तार हुआ। यह मामला इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार अब नए-नए तरीकों से सरकारी दफ्तरों में पैर पसारने की कोशिश कर रहा है।लेकिन सवाल व्यवस्था पर एक ओर शासन प्राकृतिक आपदाओं और सर्पदंश जैसी दुखद घटनाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल देने की योजनाएं चला रहा है, वहीं दूसरी ओर यदि राहत राशि तक पहुंचने के लिए पीड़ितों से रिश्वत या गारंटी मांगी जाए, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि मानव संवेदनाओं के साथ भी गंभीर विश्वासघात है।
